वैदिक संस्कृति पुनरुत्थान संस्थान

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वैदिक हिन्दू धर्म संसार का सबसे वैज्ञानिक और तर्कसंगत धर्म है

हिन्दू धर्म विज्ञान आधारित धर्म कहा जाता है। प्राचीन काल में शिक्षा का प्रचार प्रसार न होने का कारण, हिन्दू धर्म में ज्ञान विज्ञान की शिक्षा धर्म से जोड़कर और परम्पराण और वैधता में बांधकर सिखाने का प्रयास किया गया।कह रहे हैं जो वैज्ञानिक नियमों के अनुसार अपना विकास करता है वही शाश्वत होता है, यह कारण हिंदू धर्म को सनातन धर्म भी कहा जाता है। इस धर्म की नींव भी वैज्ञानिकता पर आधारित है। इसका प्रमाण सबसे पहले मिलता है प्राचीन काल के कारानित किए गए वर्ण विभाजन से, जहां व्यक्ति के कार्य के अनुसार उसके वर्ण को विभाजित किया गया था। सभी वर्णों में आपसी प्रेम और समन्वय था। इसके अलावा हमारे पूर्वोत्तर ने कई धार्मिक परम्पराएं और निर्देशों की अनुमति की है, लेकिन जब उन्हें वैज्ञानिक कसौटी पर कसा जाता है तो वे खरीद उतरती हैं।इससे यह पता चलता है कि हिन्दू धर्म पूरी तरह से वैज्ञानिक है।

तुलसी पूजन

तुलसी पूजन हर भारतीय घर की पहचान है। गृहनी द्वारा सुबह सवेरे तुलसी में पानी देने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। तुलसी एक आयुर्वेदिक औषधि भी है और यहां से कुछ भी पत्ते शरीर के हर छोटे बड़े रोग को दूर करने में कारगर सिद्ध होते हैं। यह बात वैज्ञानिक रूप से भी प्रमाणित है कि तुलसी का पौधा अपने आस-पास की हवा भी शुद्ध करता है।

सूर्य नमस्कार

सुबह स्नान के बाद सूर्य जल जलने का प्रावधान हिन्दू धर्म में है लेकिन इसके पीछे के वैज्ञानिक सत्य यह है कि सूर्योदय की किरणें स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होते हैं।

उपवास रखना

उपवास रखना  का उद्देश्य धार्मिक होता है लेकिन इसके पीछे का वैज्ञानिक सत्य यह है कि उपवास प्रक्रिया से पाचन क्रिया संतुलन और तंदुरुस्त होता है।

पूजा की घंटी और शंख ध्वनि

पूजा की घंटी का महत्व कुछ लोग जानते हैं। वैज्ञानिक तथ्य है कि मंदिर या किसी भी अर्चनास्थल पर पूजा की घंटी और शंख बजाने से पर्यावरण कीटाणु मुक्त और पवित्र होता है। शंख की ध्वनि से मलेरिया के मच्छर भी खत्म हो जाते हैं।

गायत्री  मंत्र

गायत्री मंत्र या अन्य किसी भी मंत्र का उच्चारण एक तरफ पूजा पूर्णता प्रदान करता है और मन मन केंद्रित केंद्र शारीरिक विकास का विकास करता है

हवन

दक्षिण भारत के एक मंदिर में हवन कर रहे हैं ब्राह्मण
हवन करने का उद्देश्य किसी विशेष पूजा को करना तो होता है साथ ही हवन सामग्री वातावरण भी शुद्ध होता है। हवन सामग्री में देसी घी, कपूर, आम की लकड़ी और दूसरी सामग्री होती है जिससे हवा में फैले कीटाणु नष्ट हो जाता है।

गंगा

गंगा को पाउण मानते हैं क्योंकि इसके पानी में कुछ ऐसे प्राकृतिक तत्व होते हैं, जिनके संपर्क में आने से शरीर रोग और निर्मल हो जाता है।

पूजा करना

पूजा करना एक धार्मिक कर्म तो हम साथ साथ ही यह मन की एकाग्रता भी बहुत बढ़ने में सहायक होता है।

पूजा के लिए दीये जलाना

पूजा में दिया गया जलाना, पूजन कर्म का अनिवार्य अंग है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिया अगर घी से जलाया जा तो हवा में घुड़सवार कार्बन-डाई-ऑक्ससाइड नष्ट हो जाता है और तेल के दीये से भी हानिकारक कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।

पीपल की पूजा

यूं तो शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दिया जलाने का प्रावधान शनिदेव की पूजन-अर्चना के रूप में मान जाता है, लेकिन असल में पीपल का पेड़ प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन देता है।

 

तिलक लगाना

किसी भी पूजा कर्म का प्रारंभ माथे पर तिलक लगाने से होता है। लेकिन इस तिलक का दूसरा पहलू यह है कि हमारे साथ आँखों के बीच में एक नर्व पॉइंट होता है जहां तिलक लगाकर हाथ के हलके दबाव से उसका संचार बढ़ाया जाता है। इससे एकाग्रता की शक्ति बढ़ती है और साथ ही मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति भी नियंत्रण में रखता है।

 

मंत्रोच्चारण

एक और जहां पूजा मंत्रोचचारण बिना किसी अनुभव नहीं होता है और दूसरी ओर मौत हमारे मस्तिष्क को शांत कर रहे हैं और ब्लड प्रेशर भी नियंत्रण में रखे हैं।

हल्दी लगाना

हल्दी के साथ ही विवाह कर्म की याद होती है और हर पूजा में हल्दी की गांठ होना अनिवार्य है। लेकिन यह एक सर्वव्यापी तथ्य है कि हल्दी एक अच्छी एंटी बायोसिक है और कैंसर जैसे रोगों का उपचार करने की भी शक्ति रखती है।

जनेऊ

जनेऊ रखना केवल पंडित्य की ही निशानी नहीं है यह एक गुणवत्ता एक्यूप्रेशर का काम भी करता है।

 

दाह-संस्कार

दाह-संस्कार हिन्दू धर्म का सबसे अंतिम कर्म है। वैज्ञानिक सत्य यह है कि शवदाह से प्रदूषण नहीं फैलता है।

 

शिखा रखना

शिखा रखना से न केवल धर्म की पहचान घट है आयुर्वेद के अनुसार सिर के इस भाग में सड़क कोशिकाओं का समूह होता है जोकी रक्षा शिखा के द्वारा की जाती है।

 

गोमूत्र और गाय का गोबर

गाय का हर अंग स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए उपयोगी होता है। यहां पर कारण ‘माँ’ का दर्जा दिया गया है। गाय का मूत्र जहां कई औषधि के निर्माण में काम आता है वही गोबर के लेप से विषैले कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।

योग और प्राणायाम

आज योग में न सिर्फ भारत में बल्कि विश्व मिला मिला मिला है। योग शरीर को बाहर और अंदर से स्वस्थ रखना में सहायक होता है।

इन सब विशेषताओं के कारण हिन्दू धर्म संसार का सबसे तर्कसंगत और वैज्ञानिक धर्म है।

 


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